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सीनियर डिप्लोमा (IV Year) - गायन (क्रियात्मक पाठ्यक्रम )
Submitted by raagparichay on 9 May 2022 - 11:51pm

महाविद्यालय:
Courses Subject:
Paper:
क्रियात्मक (Practical)
१. स्वर ज्ञान का विशेष अभ्यास, कठिन स्वर-समूहों की पहचान.
२. तानपुरा और तबला मिलाने की विशेष क्षमता.
३. अंकों या स्वरों के सहारे ताली देकर विभिन्न लयों का प्रदर्शन – द्विगुण (एक मात्रा में दो मात्रा), तिगुन (१ में ३) चौगुन, आड़ (२ में ३) और आड़ की उलटी (३ में २ मात्रा बोलना), (४ में ३) तथा ४ में ५ मात्राओं का प्रदर्शन.
४. कठिन और सुन्दर आलाप और तानों का अभ्यास.
५. देशकार, शंकरा, जयजयवंती, कामोद, मारवा, मुल्तानी, सोहनी, बहार, पूर्वी. इन रागों में १-१ विलंबित और द्रुत ख्याल, आलाप, तान, बोलतान सहित.
६. उक्त रागों में से किन्हीं दो में १-१ ध्रुपद तथा किन्हीं दो में १-१ धमार केवल ठाह, द्विगुण, तिगुन, और चौगुन सहित तथा एक तराना.
७. ख्याल की गायकी में विशेष प्रवीणता.
८. टप्पा और ठुमरी के ठेकों का साधारण ज्ञान. जत और आड़ा चारताल को पूर्ण रूप से बोलने का अभ्यास.
९. स्वर-समूहों द्वारा राग पहचान.
१०. गाकर रागों में समता-विभिन्नता दिखाना.
प्रयाग संगीत समिति, इलाहबाद का पाठ्यक्रम. चतुर्थ वर्ष (Senior Diploma) क्रियात्मक परीक्षा १०० अंकों की और एक प्रश्न-पत्र ५० अंकों का, पिछले वर्षों का पाठ्यक्रम भी सम्मिलित है.