शास्त्रीय संगीतः जातिवाद का दौर हुआ ख़त्म?
Submitted by Anand on 27 May 2020 - 11:27amएक सभा में कर्नाटक संगीत का कार्यक्रम चल रहा है. काफी सारे बुजुर्ग और संगीत के जानकारों के बीच एक दो विदेशी भी बैठे हैं. जैसे ही एक कार्यक्रम ख़त्म होता है, वे वहां से दूसरी जगह भागते हैं- एक और गायक को सुनने या एक और नृत्य देखने के लिए.
चेन्नई में दिसंबर और जनवरी के महीनों में एक खासियत है- इस समय यहाँ हर जगह शास्त्रीय संगीत की धुन गूंजती रहती है. 'मार्गड़ी' नाम का यह तमिल महीना यहाँ 'म्यूज़िक सीज़न' के नाम से मशहूर है.
इस समय सैकड़ों ऐसे कार्यक्रम होते हैं. यहाँ तक कि कुछ संगीत प्रेमी अपनी साल की छुट्टियां भी शास्त्रीय संगीत के लिए ही लेते हैं. Read More : शास्त्रीय संगीतः जातिवाद का दौर हुआ ख़त्म? about शास्त्रीय संगीतः जातिवाद का दौर हुआ ख़त्म?